Spirituality/"अध्यात्म"

The basic difference between a sane mind and a chaotic mind is the identification with the information.
If a person somehow finds that he is not the information which he has, and the information and the one who acces this information is different, then self can be detached from the information by constant practice of being aware of your ongoing thoughts even in the most difficult situation you face in daily life with your friends and colleagues.

अगर कोई इंसान किसी तरह से ये जान ले कि वो और उसके विचार दो अलग अलग चीजें है, तो उसको एक रास्ता तो मिल ही जाता है आगे जाने का, अगर वो खुद को अपने विचारों के साथ identify नहीं करता तो धीरे-धीरे वो इस दिमाग की चलती हुई ट्रेन से अलग हो जाता है और सुकून महसूस करता है, जिसे खोज कहा गया है जो इंसान को लगातार परेशान करती है वो कुछ और नहीं ये विचारों का ही बदला हुआ रूप है जब आप विचारों से दूरी बना लेते है ( जो भी रास्ता आप अपनाए ) तब ये खोज भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है या अगर ये रहती है तो भी आपको परेशान नहीं करती ।
ज़्यादातर ये देखा गया है कि ये खोज आपको ऐसी जगह ले जाती है जहाँ से आगे कोई रास्ता नहीं होता तब आपका दिमाग खुद ही surrender कर देता है unknown को, और झक मारके peaceful state की तरफ जाता है।

अपने विचारों को सजगता से देखना । "Awareness without interference of thought or thinker"
तो इसके लिए लगातार चल रहे विचारों को देखना और उनके साथ खुद को identify नहीं करना generally "बेसिक प्रोसेस ऑफ मेडिटेशन" है, धीरे धीरे आप अपने विचारों से अलग हो जाते है और सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही आप उनका इस्तेमाल करते है ये एक बहुत अच्छी अवस्था किसी इंसान के लिए होती है। इसमें आप काफी peaceful और energetic महसूस करते है।

अगर कहा जाए तो इसे आप मुक्ति कह लीजिए या मोक्ष या enlightenment या कुछ और, अध्यात्म से जुड़ी किसी बात को कहने के लिए इन शब्दों का हम इस्तेमाल कर लेते है पर मूलतः इसमें कोई मंजिल है नहीं, क्योंकि ये खोज अन्दर से शुरू होती है, बाहर कुछ achieve करने के लिए नहीं होता, तो इसके expression भी सबके लिए अलग-अलग हो सकते है, कोई इसे anxiety कह सकता है कोई peacefulness की खोज कह सकता है, किसी को music में सुकून मिलता है तो उसके लिए वो ही ध्यान है कोई अपने regular काम में इस joy को ढूंढ लेता है, तो इसमें आप कोई formula set नहीं कर सकते ना ही कोई defination तय कर सकते इसकी।

जैसे मेरे लिए "absence of disturbance" ये ध्यान है। जब मेरे विचार मुझे बेवजह परेशान न करें वो ही मेरे लिए ध्यान है वो कोई goal नहीं है, मैं ये नहीं कह सकता कि कैसा होना चाहिए सिर्फ ये कहा जा सकता है कि कैसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि "होना चाहिए" का कोई description नहीं है और अगर कोई उसको describe कर रहा है तो फिर वो goal हो जाता है और फिर वो आपके किसी भी बाकी materialistic goal जैसा ही है  फिर वो और कुछ भी हो पर अध्यात्म नहीं है।

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