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Showing posts from August, 2024

कोई आ रहा है क्या...

दिल है कि बस डूबता सा जा रहा है खुद को खोकर जाने क्या पा रहा है बार बार उठकर देखता हूं दरवाज़े पर कोई आ रहा है क्या इधर आ रहा है  किस तरह से ग़म संभाले देखो कोई हसीन  नगमे  जिंदगी  के गा रहा है आहिस्ता सही सीधी राह चलने वाला हर मोड़ पर  अब  जिंदगी  पा रहा है  आज की रात उजली है और हल्की भी शुक्र मनाओ दिल ठिकाने पर आ रहा है 

अध्यात्म

अध्यात्म, ये शब्द तो हम हमेशा से सुनते आए है लेकिन असल में ये है क्या इसको गंभीरता से समझने की कोशिश बहुत कम लोग करते है। आध्यात्मिकता के बारे में एक बात ये है कि ये विचार एक ही साथ बहुत दूर और पास दिखाई पड़ता है, हर समय इंसान दिमागी रूप से शांति और ठहराव की तरफ जाने की कोशिश करता है लेकिन आध्यात्मिकता को अपने से बहुत दूर समझता है जबकि अध्यात्म की शुरुआत ही वंहा हो जाती है जब ये समझ में आ जाए की हमें असल में चाहिए क्या, हमारी तलाश क्या है? जब ये बात समझ में आ जाए की आप लगातार अपने दिमाग को शांति और ठहराव की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहे है और आपके हर एक एक्शन के पीछे यही उद्देश्य है तब अध्यात्म की शुरुआत हो जाती है फिर आप धीरे धीरे अपने दिमाग में निरंतर चलने वाले विभिन्न प्रकार के विचारो, विकारों और उनके विभिन्न पहलुओं को सजग होकर देखने लगते है,  ये सजगता ही आध्यात्मिकता का मूल और पहला कदम है।

किसी अच्छे शहर...

ये किस सिम्त बढ़ता जा रहा हूं मैं लगता है आसमां से परे जा रहा हूं मैं कोई मुझे बचाए ये भी मैं नहीं चाहता और गहरे समन्दर में डूबा जा रहा हूं मैं कहिए इसे मेरी दीवानगी या क़िस्मत मेरी ये फैसला आप ही पर छोड़े जा रहा हूं मैं चले आइये साथ मेरे अगर दिल करे तो क्या पता किसी अच्छे शहर जा रहा हूं मैं ।