किसी अच्छे शहर...

ये किस सिम्त बढ़ता जा रहा हूं मैं
लगता है आसमां से परे जा रहा हूं मैं

कोई मुझे बचाए ये भी मैं नहीं चाहता
और गहरे समन्दर में डूबा जा रहा हूं मैं

कहिए इसे मेरी दीवानगी या क़िस्मत मेरी
ये फैसला आप ही पर छोड़े जा रहा हूं मैं

चले आइये साथ मेरे अगर दिल करे तो
क्या पता किसी अच्छे शहर जा रहा हूं मैं ।

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