अध्यात्म

अध्यात्म, ये शब्द तो हम हमेशा से सुनते आए है लेकिन असल में ये है क्या इसको गंभीरता से समझने की कोशिश बहुत कम लोग करते है।
आध्यात्मिकता के बारे में एक बात ये है कि ये विचार एक ही साथ बहुत दूर और पास दिखाई पड़ता है, हर समय इंसान दिमागी रूप से शांति और ठहराव की तरफ जाने की कोशिश करता है लेकिन आध्यात्मिकता को अपने से बहुत दूर समझता है जबकि अध्यात्म की शुरुआत ही वंहा हो जाती है जब ये समझ में आ जाए की हमें असल में चाहिए क्या, हमारी तलाश क्या है?
जब ये बात समझ में आ जाए की आप लगातार अपने दिमाग को शांति और ठहराव की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहे है और आपके हर एक एक्शन के पीछे यही उद्देश्य है तब अध्यात्म की शुरुआत हो जाती है
फिर आप धीरे धीरे अपने दिमाग में निरंतर चलने वाले विभिन्न प्रकार के विचारो, विकारों और उनके विभिन्न पहलुओं को सजग होकर देखने लगते है, 
ये सजगता ही आध्यात्मिकता का मूल और पहला कदम है।

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