कोई आ रहा है क्या...
दिल है कि बस डूबता सा जा रहा है
खुद को खोकर जाने क्या पा रहा है
बार बार उठकर देखता हूं दरवाज़े पर
कोई आ रहा है क्या इधर आ रहा है
किस तरह से ग़म संभाले देखो कोई
हसीन नगमे जिंदगी के गा रहा है
आहिस्ता सही सीधी राह चलने वाला
हर मोड़ पर अब जिंदगी पा रहा है
आज की रात उजली है और हल्की भी
शुक्र मनाओ दिल ठिकाने पर आ रहा है
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