इबादत

विरह में चैन किसने पाया 
ये दिल आखिर क्यों बनाया

तेरे आगे झुक गया दिल खाली हो गया
तुझमें एक अरसे तक मेरा खुदा रहा

मेरे दर्द का हिसाब महज़ ना मेरे आंसुओं से करो
शदीद दर्द वो भी थे जब जब मैं रोया नहीं

ज़िक्र करो तो करो उस नूर का 
आराम पहुँचे हमें भी तुम्हें भी 


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